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महासचिव बनने के बाद प्रियंका गांधी का पहला भाषण, मंच पर आते ही लगे 'इंदिरा गांधी जिंदाबाद' के नारे

महासचिव बनने के बाद प्रियंका गांधी का पहला भाषण, मंच पर आते ही लगे 'इंदिरा गांधी जिंदाबाद' के नारे

March 14 Thursday, 2019 03:32
 महासचिव बनने के बाद प्रियंका गांधी का पहला भाषण, मंच पर आते ही लगे 'इंदिरा गांधी जिंदाबाद' के नारे

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने कमर कस ली है. बीपेजी से लेकर कांग्रेस तक, प्रचार-प्रसार में लगे हैं. कांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव बनने के बाद प्रियंका गांधी वाड्रा ने पहला आधिकारिक भाषण दिया. गुजरात के गांधीनगर में मंगलवार को आयोजित कांग्रेस की रैली में उन्होंने भाषण दिया. उन्होंने जनता से जागरुकता की अपील की. साथ ही बीजेपी और मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए देश की तमाम समस्याओं का जिम्मेदार ठहराया. पार्टी की बड़ी रैली में इस डेब्यू स्पीच के बाद अब लोगों की नजरें उनकी चुनावी कैंपेनिंग पर टिकी हैं. उनके भाषण की खूब तारीफ हो रही है. मंच पर आते ही लोगों ने 'इंदिरा गांधी जिंदाबाद' के नारे लगाए.

प्रियंका गांधी ने भाषण की शुरुआत में पहले महिलाओं और फिर पुरुषों को संभोधित किया. उन्होंने कहा- 'मेरी बहनों और मेरे भाइयों आपके इस प्रेम भरे स्वागत के लिए मैं बहुत आभारी हूं.' जिसके बाद असम के सिल्चर की सांसद सुष्मिता देव ने लिखा- 'गुजरात में प्रियंका गांधी की स्पीच काफी प्रभावित लगी. मुझे बहुत अच्छा लगा कि उन्होंने पुरुषों से पहले महिलाओं का नाम लिया. उन्होंने भाईयों और बहनों की जगह बहनों और भाइयों कहा.'प्रियंका गांधी ने तीसरा ट्वीट करते हुए सुष्मिता देव को रिप्लाई देते हुए कहा- 'मुझे लगा किसी ने नोटिस नहीं किया.' उनका ये ट्वीट काफी वायरल हो रहा है.14 मार्च की सुबह 9 बजे उन्होंने रिप्लाई दिया. खबर लिखे जाने तक 9 हजार से ज्यादा लाइक्स और 2 हजार से ज्यादा रि-ट्वीट्स हो चुके हैं. बता दें, पिछले महीने ही प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्विटर पर अपना अकाउंट बनाया था. अब तक उनके 2 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. प्रियंका गांधी ने कहा कि लोगों को जागरूक होना जरूरी है.

देश में जो कुछ हो रहा है उससे वह दुखी हैं. लोगों को बांटा जा रहा है, नफरत फैलाई जा रही है और जो सच्चे मुद्दे हैं उनकी बात सरकार नहीं करती. उन्होंने जनता से मुखातिब होते हुए अपने पहले भाषण कहा- ''आपसे दो शब्द कहती हूं जो मेरे दिल में है. पहली बार मैं गुजरात आई हूं और पहली बार साबरमती के उस आश्रम में गई जहां से महात्मा गांधी जी ने आजादी का संघर्ष शुरू किया था. ऐसा लगा कि आसूं आने वाले हैं, क्योंकि मैंने उन देशभक्तों के बारे में सोचा जिन्होंने जीवन संघर्ष किया, अपनी जान तक दी. जिनके बलिदानों पर इस देश की नींव डली है. वहां बैठे हुए यह बात आई कि यह देश प्रेम, सद्भावना और आपसी प्यार के आधार पर बना है. मैं दिल से कहना चाहती हूं कि इससे बड़ी कोई देशभक्ति नहीं है कि आप जागरूक बनें. आपकी जागरुकता एक हथियार है. यह ऐसा हथियार है, जिससे किसी को दुख नहीं देना है किसी को चोट नहीं पहुंचनी. पर यह आपको मजबूत बनाएगा.''


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